(उत्तर प्रदेश शासन – स्टाम्प एवं निबंधन विभाग, दिनांक 19.11.2025)

1. वैधानिक पृष्ठभूमि

उत्तर प्रदेश शासन द्वारा भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 की धारा 9(1)(क) के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह अधिसूचना जारी की गई है। यह आदेश अधिनियम की अनुसूची I-B के अनुच्छेद-35 के अंतर्गत आने वाले पट्टा / लीज़ विलेखों पर देय स्टाम्प शुल्क से संबंधित है।

 

2. अधिसूचना की प्रकृति एवं वैधता

  • यह शासनादेश इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से जारी किया गया है, अतः हस्ताक्षर अपेक्षित नहीं हैं।
  • शासनादेश की प्रामाणिकता shasanadesh.up.gov.in वेबसाइट से सत्यापित की जा सकती है।
  • यह अधिसूचना राजपत्र में प्रकाशन की तिथि से छह माह की अवधि के लिए प्रभावी रहेगी।

 

3. प्रदान की गई राहत का स्वरूप

  • शासन द्वारा पट्टा विलेखों पर देय स्टाम्प शुल्क के लिए अधिकतम सीमा (Ceiling) निर्धारित की गई है।
  • यदि सामान्य प्रावधानों के अनुसार गणना किया गया स्टाम्प शुल्क निर्धारित सीमा से अधिक होता है, तो अधिक राशि शासन द्वारा माफ (Remit) की जाएगी।
  • यह पूर्ण छूट नहीं, बल्कि सीमित छूट (Ceiling आधारित राहत) है।

 

4. अपवर्जन (Exclusions)

निम्नलिखित मामलों में यह छूट लागू नहीं होगी—

  • टोल से संबंधित किसी भी प्रकार के पट्टा / लीज़ करार, तथा
  • खनन (Mining) से संबंधित पट्टा / लीज़ करार

 

5. औसत वार्षिक किराया के आधार पर अधिकतम स्टाम्प शुल्क

(क) औसत वार्षिक किराया ₹2,00,000 तक

  • 1 वर्ष तक: ₹500
  • 1 वर्ष से अधिक एवं 5 वर्ष तक: ₹1,500
  • 5 वर्ष से अधिक एवं 10 वर्ष तक: ₹2,000

(ख) ₹2,00,001 से ₹6,00,000 तक

  • 1 वर्ष तक: ₹1,500
  • 1 वर्ष से अधिक एवं 5 वर्ष तक: ₹4,500
  • 5 वर्ष से अधिक एवं 10 वर्ष तक: ₹7,500

(ग) ₹6,00,001 से ₹10,00,000 तक

  • 1 वर्ष तक: ₹2,500
  • 1 वर्ष से अधिक एवं 5 वर्ष तक: ₹6,000
  • 5 वर्ष से अधिक एवं 10 वर्ष तक: ₹10,000

निर्धारित सीमा से अधिक गणना होने पर अतिरिक्त स्टाम्प शुल्क माफ किया जाएगा

 

6. व्यावहारिक एवं पेशेवर प्रभाव

  • यह शासनादेश कम एवं मध्यम मूल्य वाले लीज़ अनुबंधों पर स्टाम्प शुल्क का भार कम करता है।
  • स्टाम्प ड्यूटी पर निश्चितता (Cost Certainty) प्रदान करता है।
  • छोटे व्यवसायों, वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों, कार्यालयों एवं रिटेल लीज़ के लिए प्रोत्साहनकारी है।
  • पेशेवरों को परामर्श देते समय निम्न बिंदुओं पर विशेष ध्यान आवश्यक है—
    • औसत वार्षिक किराये की सही गणना, तथा
    • लीज़ अवधि का उचित निर्धारण, क्योंकि इन्हीं के आधार पर स्टाम्प शुल्क की सीमा तय होगी।

 

7. निष्कर्ष

यह अधिसूचना उत्तर प्रदेश में पट्टा विलेखों पर स्टाम्प शुल्क के युक्तिकरण एवं अस्थायी राहत के उद्देश्य से जारी की गई है। पात्र मामलों में लाभ प्राप्त करने हेतु संबंधित पक्षों को सलाह दी जाती है कि वे वैधता अवधि के भीतर लीज़ विलेख का निष्पादन एवं पंजीकरण कराएं, तथा अपवर्जित श्रेणियों से संबंधित मामलों में इस छूट का दावा न करें।

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